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मंत्रों की शक्ति से बरसती है शिव की कृपा : कैलाशानन्द ब्रह्मचारी

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मंत्रों की शक्ति से बरसती है शिव की कृपा : कैलाशानन्द ब्रह्मचारी

मंत्रों की शक्ति से बरसती है शिव की कृपा : कैलाशानन्द ब्रह्मचारी
July 27
12:05 2017

वासुदेव राजपूत

हरिद्वार। श्रीदक्षिण काली पीठाधीश्वर तथा श्री कैलाशेश्वर सदाशिव मंदिर के संस्थापक महामण्डलेश्वर श्री कैलाशानन्द ब्रह्मचारी जी महाराज ने कहा है कि शिव ही सृष्टि के सर्वशक्तिमान आदिदेव हैं और मंत्रों की शक्ति से शिव की कृपा का भक्त के अन्तःकरण में समावेश हो जाता है जिससे शिवमय होकर संसार में सुख, शांति और समृद्धि को प्राप्त करता है, वे आज पतित पावनी मां गंगा के नीलधारा तट पर स्थित अनादि सिद्धपीठ श्रीदक्षिण काली मन्दिर पर चल रहे महारुद्राभिषेक में पधारे साधकों को शिव महिमा से अविभूत कर रहे थे।

महारुद्र के अभिषेक को महान पुण्य फलदायी और जीवन को उपयोगी बनाने वाला बताते हुए कहा कि संसार में आकर व्यक्ति को संगति, विसंगति और सज्जन तथा दुर्जन सभी के साथ रहना पड़ता है, समाज में रहकर व्यक्ति दुर्व्यसनों से दूर नहीं रह सकता और उनका प्रभाव भी मानव जीवन पर पड़ना स्वभाविक है। सनातन धर्म शास्त्रों, देव स्थानों तथा सिद्धपीठों पर होने वाले अनुष्ठान व्यक्ति के जीवन में आयी विसंगतियों को दूर करते हैं। अनादि सिद्धपीठ श्रीदक्षिण काली मन्दिर विश्व का एकमात्र जाग्रत सिद्धपीठ है जहां वर्ष पर्यन्त अनेक अवसरों पर लोक कल्याणकारी अनुष्ठान होते रहते हैं जिसमें श्रावण मास का महारुद्राभिषेक सबसे बड़ा वार्षिक अनुष्ठान है जिसका सानिध्य प्राप्त करते ही शिव की कृपा बरसने लगती है। शिवोपासना के बीजमंत्र, महामंत्र, महामृत्युज्जय मंत्र, शिव ताण्डव सहित ढाई दर्जन ऐसे जीवनोपायोगी मंत्र हैं जो मां काली एवं सदाशिव के दरबार को अध्यात्म चेतना से प्रतिदिन जागृत करते हैं। इस अनुष्ठान की विशेषता है कि जो साधक महारुद्राभिषेक का सानिध्य प्राप्त कर लेता है उसको मानसिक शांति के साथ सुख और समृद्धि का वरदान प्राप्त हो जाता है।

भगवान भोलेनाथ का गंगा जल से अभिषेक दुग्धाभिषेक, पंचामृत स्नान, चंदन, 108 नारियल जल का स्नान, इत्र तथा पुष्प एवं पुष्प मालिकाओं का श्रृंगार करने के बाद जब आरती और पूजन का प्राकृतिक वातावरण बनता है तो व्यक्ति के हृदय में समाहित हुई दुष्प्रवृत्तियां स्वतः ही अन्तःकरण से दूर हो जाती हैं और जब हृदय पवित्र हो जाता है तो पावन मन में ही भगवान का वास होता है। मंत्रों का सानिध्य पाकर व्यक्ति के अन्तर्मन को मिलने वाली शांति की जानकारी देते हुए बताया कि मंत्रोंच्चारण की तरंगों का वैज्ञानिक कारण है जो व्यक्ति की विचारधारा को बदल कर नकारात्मकाता को भी सकारात्मक बना देती है। उन्होंने सभी भक्तों को भोलेनाथ की कृपा का आशीर्वाद देते हुए कहा कि यज्ञ और अनुष्ठान में आने वाले में स्वतः ही दैवीय शक्ति का समावेश हो जाता है। अनुष्ठान प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त से प्रारम्भ होकर अपरान्ह तक चल रहा है जिससे सैकड़ों श्रद्धालु प्रतिदिन भोलेनाथ की कृपा प्राप्त कर पुण्यफल प्राप्त कर रहे हैं।

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