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शहर के सांथ सांथ  अब गांव दर गांव होने लगा है रावण के पुतले का दहन

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शहर के सांथ सांथ  अब गांव दर गांव होने लगा है रावण के पुतले का दहन

शहर के सांथ सांथ  अब गांव दर गांव होने लगा है रावण के पुतले का दहन
September 22
07:09 2017

कई जगह बन रहे हैं बुराई के प्रतीक रावण के पुतले

शहर में विशेष रुप से होता है रावण कुंभकरण मेघनाथ के पुतले का दहन

हरिद्वार/रुड़की शहर में सभी जगह नवरात्रि की धूम मची हुई है। पूरा शहर जमगम लाइटों से रोशन हो रहा है। मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। इसी बीच कुछ लोग बुराई का प्रतीक बनाने में अपना दिन और रात का समय दे रहे हैं। यह प्रतीक है रावण के पुतले। शहर में कई कारीगर दिन रात मेहनत करके रावण दहन के लिए पुतले बना रहे हैं। कोई छोटे तो कोई बड़े। रावण के साथ उसके साथी भी तैयार किए जा रहे हैं जिनमें कुंभकरण और मेघनाथ शामिल हैं।

मान्यता के अनुसार इन नवरात्रि के बाद दशहरा आता है उस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था और बुराई पर अच्छाई की जीत हुई थी। इसी दिन को याद करने के लिए हम आज भी प्रतीकात्मक रावण बनाकर पुतले का दहन करते हैं। रावण को बुराई का प्रतीक माना जाता है। इसलिए यह प्रथा सालों से चली आ रही है।ऋ

कैसे बनता है रावण

रावण का पुतला मूल रूप से घास और बांस की लकड़ी से बनाया जाता है। जिसमें रंगों से सजाकर जान डाली जाती है। मखमली कपड़ों के लिवास के साथ रावण का पुतला पूरी तरह से तैयार हो जाता है। फिर इसके दहन में सभी को आनंद की अनुभूति हो इसलिए पटाखे लगाए जाते हैं। रावण के चेहरे आदि को बनाने के लिए सादे कपड़े या कागज का इस्तेमाल किया जाता है।ऋ

दुगने दाम पर बिक रहे रावण के पुतले

रावण के पुतले बनाने वाले एक करीगर ने बताया कि इस साल महंगाई इतनी बढ़ गई है कि जो रावण वह 2100 रुपए में देते थे अब मजबूरीवश 11000 रुपए में देना पड़ रहा है। क्योंकि इसकी लागत में उपयोग में आने वाली  सामग्री बहुत महंगी हो गई है। इन्होंने बताया कि इनके पास 2100 सौ से लेकर 51 हजार तक के रावण के पुतले उपलब्ध हैं।ऋ

यहां पर होता है रावण के पुतले का दहन

रावण के पुतले का दहन हरिद्वार भेल  नेहरू स्टेडियम, एसडी डिग्री कॉलेज के ग्राउंड ,रामनगर इमलीखेड़ा ,धनोरी मानकमजरा ,डाडा जलालपुर ,भगवानपुर लक्सर ,बहादराबाद

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